---------------चारू जल्दी से अपार्टमेंट मे आ जाती है। उसकी धडकने तेज थी। गीले बाल चेहरे से लेकर गर्दन तक चिपक गए थे। अमर की करीबी उसके अंदर कंपन पैदा कर रही थी। अमर की आवाज ' ब्रीथ प्रोफेसर..ब्रीथ ! " उसके कानो मे गूंज रही थी। चारू के गाल गर्म होने लगे। वो दरवाजे से टिक कर खडी हो गई।अमर की बदमाशी याद कर चारू की सिहर उठी । उसे लगा मानो अभी भी अमर उसकी करीब खडा..उसी शरारती मुस्कान से उसे देख रहा है। " बद्तमीज ! ", चारू हथेलियो से अपने गाल रगडती हुई बुदबुदाई। उसने अपने आप कौ देखा तो पाया