माई डियर प्रोफेसर - भाग 37

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----------------स्टेज से भागकर चारू युनिवरासिटि के एक सुनसान केन्द्र मे आ गई थी। वो एक पिलर से टिक कर घुटनो मे सर छुपा कर रोए जा रही थी। उसके गले मे हिचकिया बंध गई थी। शरीर कांप रही था। रात भर की थकान अब शरीर पर जोर डाल रही थी। उसे एंग्जायटी और जकडती उससे पहले ही चारू की नाक से जंगल और कॉफी की खुशबू टकराई । वो सिहर उठी । तभी एक हाथ आकर उसके कंधो के इर्द-गिर्द लिपट गया। चकरू की सांस अटक गई।  उसने सर उठाकर देखा तो, सामने जो इंसान था उसे देख पिछले पांच साल