अध्याय : फल से कारण तक — रूप के पार निराकार सत्यबीज-वाक्य “फल को मत पकड़ो, कारण तक जाओ।रूप को देखो, पर रूप को अंतिम सत्य मत मानो।” 1. धर्म की पहली भूल — फल को भगवान बना देनामनुष्य को जो दिखाई देता है, मन उसी को सत्य मानने लगता है।एक महान व्यक्ति दिखाई दिया—मनुष्य ने उसे भगवान बना दिया।एक अद्भुत गुरु मिला—उसे अंतिम सत्य मान लिया।किसी संत ने असाधारण कार्य किया—उसके चारों ओर चमत्कार की कथा बना दी।किसी मूर्ति के सामने शांति मिली—मूर्ति को ही परम सत्ता मान लिया।यहीं से धर्म का रूप बदलने लगता है।जिस व्यक्ति, मूर्ति, गुरु या घटना