प्रथमाष्टमी

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​मार्गशीर्ष का महीना जब भी आता है, मेरी स्मृतियों के आँगन में हल्दी के पत्तों की वह सोंधी खुशबू तैरने लगती है। बचपन से लेकर शादी से पहले तक, यह महीना मेरे लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। घर की पहली संतान होने के नाते, प्रथमाष्टमी के दिन मुझे जो 'राजकुमारी' वाला ट्रीटमेंट मिलता था, उसकी मिठास आज भी मेरे मन में रची-बसी है।​मुझे याद है, इस दिन सुबह से ही घर में एक अलग सी चहल-पहल होती थी। मामा के यहाँ से आया हुआ 'मामुघर भार' जब खुलता, तो उसमें मेरे लिए रखे नए-नवेले रेशमी कपड़े, मिठाइयाँ, नारियल,