अगली सुबह बनारस की सड़कों पर फिर वही रौनक लौट आई थी, लेकिन शक्ति के लिए पिछली रात अभी खत्म नहीं हुई थी।वह अपने कमरे में बैठी केस की फाइलें देख रही थी। सामने वही फोन रखा था, जो उसे घटनास्थल से मिला था।लेकिन बीच-बीच में शक्ति का ध्यान भटक जाता।उसे याद आ जाता—वो बहस...शिवाय की बात...और फिर...वो थप्पड़।शक्ति ने तुरंत अपने विचारों को झटक दिया।"मुझे उसकी बात पर इतना react नहीं करना चाहिए था..."उसने धीमे से खुद से कहा।तभी शक्ति का चेहरा सख्त हो गया, क्योंकि उसके सामने रखे फोन की घंटी बजने लगी। स्क्रीन पर एक अनजान नंबर चमक