हवेली की विशाल संगमरमर की दीवार पर टंगी प्राचीन घड़ी ने जैसे ही शाम के सात बजने का ऐलान किया, हर एक टिक-टिक की आवाज़ के साथ माया के दिल की धड़कनें बेकाबू होकर सीने से बाहर आने को बेताब होने लगीं। पूरा दिन इस आलीशान, बंद कमरे में घुट-घुट कर बिताने के बाद अब वह वक्त बेहद करीब आ चुका था जिसका खौफ़ माया को सुबह से सता रहा था। कमरे का विशाल ड्रेसिंग शीशा उसके ठीक सामने था, जिसमें लाल सिल्क की भारी साड़ी में लिपटी वह खुद को बेबसी से देख रही थी। सुबह जाते-जाते आर्यन के