घुँघरू - 1

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करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना घटी। हुआ यूँ कि आखिरी दिन बाबा बटेश्वर की नज़र गेरुआ धोती में लिपटी जामून के पेड़ का ओट लेकर खड़ी घुॅंघरू पर पड़ ग‌ई ... अपनी शक्तियों द्वारा जैसे उन्होंने सारा भेद जान लिया । वो घुॅंघरू को कठोर नजरों से देखते हुए प्रचण्ड स्वर में बोले, " विश्वासघातिनी ! तू ही है ना वो जिसने ठाकुर वीर सिंह के लिए यम का दरवाजा खटखटाया ...... किचकन्या की साथिन यहाँ आ ! "गाँव के कुछ लोग उसे किचकन्या की साथिन जान कर