रात का सन्नाटा कमरे की चार दीवारों के भीतर और गहराता जा रहा था। मद्धम पीली रोशनी में आर्यन का साया माया पर पूरी तरह छाया हुआ था। दीवार से सटी खड़ी माया की साँसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। आर्यन की सख्त और गर्म उंगलियों की पकड़ उसकी कमर पर और गहरी हो गई। माया ने अपनी बंद आँखों को खोलने की हिम्मत की, तो सीधे आर्यन की उन कड़क और गहरी आँखों से टकराई, जिनमें एक अजीब सा जुनून और अधिकार का नशा तैर रहा था।"छोड़िए मुझे... आप ऐसा नहीं कर