स्वास्तिक - तुम्हारी मीरा दी तो लगता हैं काटने में कुछ ज्यादा ही एक्सपर्ट हैं..... फिर अभिराम से चल यार तू दूसरी पतंग ला.... इस बार मैं उडाऊंगा और तू माझा संभालना lअब एक बार फिर से पतंगबाजी शुरू हो जाती हैं इस बार पतंग की डोर स्वास्तिक और मीरा के हाथों में होती हैं....दोनों का ही ध्यान पतंग पर होता है.....इस बीच मीरा को गर्मी का ऐहसास होता है तो वह पतंग की डोर अधीरा के हाथों में थमा देती हैं और कहती हैं तुम डोर संभालो तब तक मैं ब्लेजर उतार कर आती हूँ l उधर मीरा ब्लेजर उतार