अभिराम - हंसते हुए प्यार में तो पापड़ बेलने ही पड़ते हैं और इंतजार भी करना पड़ता है इसलिए सब्र कर, सब्र का फल मीठा होता स्वास्तिक - तू अभी मेरे मजे ले ले जब तुझे प्यार होगा न तब तुझे पता चलेगा lअभिराम - पता हैं न "नींद गयी चैन गया सुकुन के साथ-साथ कमबख्त दिल भी जो कभी मेरा था आज किसी और का हो गया "स्वास्तिक - वाह वाह अरे यार क्या शायरी की हैं तूने एक दम मेरे दिल का हाल बयां करती हैं .....मुझे तो पता ही नहीं था तुझे शायरी करना भी आता है अभिराम - बस तेरी हालत देखकर ऐसे हो