प्रतीकोपासना - भाग 4

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प्रतीकोपासना :- संपूर्ण साधना का क्रमभाग ४ : स्वप्रतीक से चिदाकाश तकअब तक हमने प्रतीकोपासना के तीन प्रमुख चरणों को समझा है। पहले चरण में साधक अपने ही प्रतिबिंब को स्वप्रतीक बनाकर उसका अभ्यास करता है। दूसरे चरण में यही साधना इंद्रिय-निरोध, वायु-निरोध और आत्मज्योति के दर्शन तक पहुँचती है। तीसरे चरण में साधक को नाद का अनुभव होता है, वह अपने चित्त को नाद में स्थिर करता है और वहाँ से लय तथा चिदाकाश की दिशा में आगे बढ़ता है।अब इन सभी चरणों को अलग-अलग देखने के बजाय एक संपूर्ण साधना-क्रम के रूप में समझते हैं। इससे स्पष्ट होगा