अवनि ने अपनी नज़रें झुका लीं, पर उसने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। उसे महसूस हो रहा था कि आर्यमन का स्पर्श उसे केवल सुरक्षा ही नहीं दे रहा, बल्कि उसके अस्तित्व को स्वीकार कर रहा है।रूहानी जुड़ावआर्यमन ने अवनि के उस कोमल हाथ को बड़े ही सम्मान के साथ अपने दोनों हाथों के बीच सुरक्षित कर लिया, जैसे वह कोई कांच का कीमती खिलौना हो। वह अवनि के चेहरे की मासूमियत को निहारते हुए बोला:"अवनि, यह हाथ... जिसने कल मेरी डूबती हुई सांसों को थाम लिया, मैं आज वादा करता हूँ कि अब ताउम्र इस हाथ को कभी नहीं