कागज की नावबरसात का महीना था। दिल्ली में पिछले 7 दिन से लगातार बारिश हो रही थी। अभिमन्यु, उम्र 32 साल, एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क। रोज की तरह वो 8:32 की लोकल पकड़ने के लिए भाग रहा था। हाथ में छाता, कंधे पर बैग, और बैग के अंदर टिफिन।पटरी के पास वाले नाले में पानी उफान पर था। तभी उसने देखा - एक छोटी सी कागज की नाव, पानी में डगमगा रही है, पर डूब नहीं रही है।उस नाव के अंदर कुछ लिखा हुआ था।उत्सुकता में उसने नाव उठा ली। भीगते हुए कागज पर टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था -"मेरा