समय का कुआं

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अध्याय 1: बरगदपुर का वो कुआँबरगदपुर। नाम से ही पता चलता है, गाँव के बीचों-बीच एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी जड़ें दूर-दूर तक फैली हुई थीं। और उसी बरगद की सबसे मोटी जड़ के ठीक नीचे था वो कुआँ।गाँव के बुजुर्ग उसे 'अंधा कुआँ' कहते थे। क्योंकि उसका पानी इतना काला था कि उसमें अपनी परछाई भी नहीं दिखती थी। अंग्रेजों के जमाने का कुआँ था, कहते हैं। किसी ने उसे कभी सूखते नहीं देखा, और किसी ने उसमें से पानी पीते हुए भी किसी को नहीं देखा।इसी गाँव में रहता था हरिराम। उम्र पच्चीस साल, पेशे से