एक भाई का प्यार... एक लड़की का समर्पण... और एक ऐसा राज़, जो तीन जिंदगियों को बदलने वाला था।Preview-आखिरी खतरात के 2 बजकर 17 मिनट हो चुके थे।पूरा घर अंधेरे में डूबा था।लेकिन कमरे के कोने में रखी एक छोटी-सी मेज पर अब भी एक दीपक जल रहा था।उस दीपक के सामने प्रियांक बैठा था।उसकी आँखें लाल थीं।हाथ में एक पुराना खत था...और सामने दीवार पर लगी एक तस्वीर।तस्वीर में एक मुस्कुराता हुआ चेहरा था।हार्दिक।प्रियांक का बड़ा भाई।उसने काँपते हाथों से खत खोला।कागज पर सिर्फ चार लाइनें लिखी थीं—“प्रियांक,अगर तू ये खत पढ़ रहा है, तो समझ लेना मैं तुझसे