ब्लूबेरी कॉटेजभाग - २ लेखिका "अनामिका"अमित ने कांपते हाथों से जैसे ही उस बंद कमरे की कुंडी खोली और दरवाज़ा पीछे धकेला, अंदर का नज़ारा देखकर उसके रोंगटे खड़े हो गए।कमरे में कोई मौजूद नहीं था, लेकिन चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री, चीखों और खौफ़नाक सन्नाटे की गूंज साफ़ सुनाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था मानो तीन-चार लोग किसी चीज़ से बुरी तरह डरकर बाहर की तरफ़ भाग रहे हों। सीमा और अनन्या ने घबराकर अमित का हाथ कसकर पकड़ लिया।अमित ने हिम्मत जुटाकर कमरे में दो कदम और आगे बढ़ाए। उसकी नज़र अचानक पलंग के नीचे पड़ी। अंधेरे में एक