आखिरी चिट्ठी

बारिश की शाम थी। नंदिनी स्टेशन की पुरानी बेंच पर बैठी थी। आज ठीक पाँच साल बाद उसने वही जगह चुनी थी, जहाँ आर्यन ने उससे आख़िरी बार कहा था, अगर किस्मत ने चाहा, तो यहीं मिलेंगे।वह कभी नहीं आया।हर साल इसी तारीख़ को नंदिनी यहाँ आती थी। कुछ देर उस बेंच पर बैठती, आती-जाती ट्रेनों को देखती और बिना कुछ कहे लौट जाती। उसे लगता था कि शायद किसी दिन भीड़ में वही मुस्कान फिर दिखाई दे जाएगी।तभी एक बूढ़े चायवाले ने आवाज़ दी, बिटिया... ये चिट्ठी तुम्हारे लिए है।मेरे लिए?एक लड़का पाँच साल पहले छोड़ गया था। बोला