अंग्रेजी स्कूल

रामप्रसाद की आँखों में आँसू थे, लेकिन होंठों पर मुस्कान। उसने अपने दस साल के बेटे गोविंद को नये स्कूल की यूनिफॉर्म पहनाई। वह यूनिफॉर्म इतनी साफ और महँगी लग रही थी कि रामप्रसाद को अपनी धोती और फटी कमीज़ शर्मिंदा कर रही थी।"बेटा, आज से तू उसी स्कूल में पढ़ेगा जहाँ साहब लोगों के बच्चे पढ़ते हैं," रामप्रसाद की आवाज़ काँप रही थी।गोविंद की माँ सरस्वती किचन से बाहर आई। उसके हाथ में एक कटोरी दूध था। "पी ले बेटा। आज तेरा पहला दिन है। अच्छे से पढ़ना।"गोविंद ने दूध पिया, लेकिन उसकी नज़रें घर की टूटी दीवारों पर