तस्वीर देखते ही रिया के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। जो आँखें अब तक मासूमियत और चंचलता से छलकती थीं, उनमें अब साफ़ तौर पर डर और पकड़े जाने की बौखलाहट दिख रही थी। कैफे का खुशनुमा माहौल आरव के लिए एक दमघोंटू सन्नाटे में बदल चुका था। बाहर बारिश तेज़ हो रही थी और कांच की खिड़कियों पर टकराती बूंदें किसी खतरे की घंटी जैसी लग रही थीं।आरव ने ठंडी और सख्त आवाज़ में दोबारा पूछा, "अब भी कुछ कहना बाकी है, रिया? या फिर तुम्हारा असली नाम भी कुछ और है?"रिया ने एक गहरी सांस ली। उसने इधर-उधर