फोन की स्क्रीन पर चमकते हुए रिया के नाम को देखकर आरव की उंगलियाँ एक पल के लिए जम सी गईं। उसके सीने में गुस्से, दर्द और धोखे का ऐसा बवंडर उठ रहा था, जिसे संभालना नामुमकिन सा लग रहा था। लेकिन उसने खुद पर काबू पाया, अपनी कांपती सांसों को स्थिर किया और ग्रीन बटन को स्लाइड करके फोन कान से लगाया।"आरव... हेलो, आरव?" दूसरी तरफ से रिया की वही जानी-पहचानी, सुरीली और मासूम आवाज़ गूंजी।आरव ने अपने लहजे को पूरी तरह सामान्य रखते हुए कहा, "हाँ रिया, कहाँ हो तुम? कल रात से तुम्हारा फोन स्विच ऑफ आ