PLATFORM - 10

  • 51

अध्याय 10: जागने के बाद“इस बार तुम्हें खुद को बचाना है।”अंगद उस दूसरे अंगद को देखता रहा।बारिश उसके चेहरे पर पड़ रही थी।प्लेटफ़ॉर्म खाली था।सिर्फ तीन लोग थे—अंगद।मीरा।और वह दूसरा अंगद।ट्रेन के भीतर।घड़ी की सुई—11:52पर अटकी हुई थी।अंगद ने काँपती आवाज़ में पूछा—“तुम कौन हो?”दूसरा अंगद मुस्कुराया।“जिसे तुम पिछले दस साल से बनने की कोशिश कर रहे हो।”“क्या मतलब?”“तुम्हें याद है तुमने उस रात क्या माँगा था?”अंगद चुप।अचानक उसके दिमाग में एक दृश्य चमका।दस साल पहले।बारिश।वही स्टेशन।वही ट्रेन।लेकिन इस बार याद साफ थी।वह मीरा के साथ बैठा था।मीरा रो रही थी।“तुम्हें हर चीज़ जीतनी क्यों होती है, अंगद?”“क्योंकि हारने का