PLATFORM - 9

अध्याय 9: आख़िरी सफ़रअस्पताल की खिड़की के बाहर बारिश हो रही थी।अंगद ICU के बाहर खड़ा था।काँच के उस पार मीरा अब भी बेहोश थी।मशीनें चल रही थीं।बीप… बीप… बीप…लेकिन अंगद के दिमाग में सिर्फ एक आवाज़ थी—“अकेले मत जाना।”वह धीरे से दीवार से टिक गया।दस साल।दस साल से उसका शरीर इसी अस्पताल में पड़ा था।और इन दस सालों में उसका दिमाग…एक ऐसी दुनिया बना चुका था, जहाँ मीरा उसके साथ थी।लेकिन अगर वो दुनिया सिर्फ सपना थी—तो उसे हर रात वही ट्रेन क्यों दिखाई देती थी?वही स्टेशन।वही समय।वही डिब्बा।और सबसे अजीब—मीरा को भी वही सब क्यों याद था?---डॉक्टर बाहर