बारिश, तुम और हमारी वो शाम

मौसम में एक अजीब सी कशिश थी। आसमान में काले घने बादल छाए हुए थे और मिट्टी की वो सोंधी-सोंधी महक हवा में घुल चुकी थी। मयूर अपनी बालकनी में खड़ा, बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देख रहा था। लेकिन उसका मन उस बारिश में नहीं, बल्कि किसी और के ख्यालों में भीग रहा था—शैली के ख्यालों में।तभी दरवाज़े पर एक हल्की सी दस्तक हुई। मयूर ने धड़कते दिल के साथ दरवाज़ा खोला। सामने शैली खड़ी थी। बारिश की वजह से वो हल्की सी भीग गई थी। उसकी नीली कुर्ती बारिश की बूंदों से नम हो गई थी और