PLATFORM - 8

अध्याय 8: कोमा के भीतरधड़… धड़… धड़…ट्रेन के पहियों की आवाज़ अंधेरे अस्पताल में गूँज रही थी।अंगद बिल्कुल स्थिर खड़ा था।उसके सामने मीरा थी।लेकिन अब वह अस्पताल के बिस्तर पर भी थी…और उसके सामने भी।दो अलग-अलग जगहों पर एक ही इंसान।एक सवाल उसके दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहा था—अगर मीरा का शरीर दस साल से कोमा में है, तो उससे मिलने वाला कौन था?अचानक लाइट वापस आ गई।अंगद ने सामने देखा।मीरा गायब थी।सिर्फ बिस्तर पर पड़ी उसकी देह थी।मॉनिटर पर वही नियमित धड़कन—बीप… बीप… बीप…अंगद धीरे-धीरे उसके पास गया।“मीरा…”कोई प्रतिक्रिया नहीं।उसने उसका हाथ छूने की कोशिश की।इस बार