अध्याय 7: दस साल की नींदट्रेन चल रही थी।लेकिन अंगद के लिए समय रुक चुका था।वह अपनी सीट पर बैठा था और सामने की खाली सीट को घूर रहा था।कुछ मिनट पहले वहाँ मीरा बैठी थी।अब वहाँ सिर्फ उसकी परछाईं जैसी एक हल्की-सी नमी थी।अंगद ने अपनी हथेली खोली।वही चाँदी की अंगूठी।एम।उसने अंगूठी को मुट्ठी में कस लिया।उसके दिमाग में एक ही बात घूम रही थी—“मैं अभी भी वहीं हूँ, अंगद।”उसने आँखें बंद कीं।फिर वही आवाज़—बीप…बीप…बीप…उसने अचानक आँखें खोल दीं।सामने ट्रेन थी।लेकिन मशीन की आवाज़ अब भी सुनाई दे रही थी।बहुत धीमी।जैसे कहीं बहुत दूर से आ रही हो।अंगद ने