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अध्याय 5: दस साल पुरानी रातकागज़ अब भी अंगद की उँगलियों के बीच था।16 अगस्त 2016।वही तारीख।दस साल पुरानी।उसने कागज़ को पलटा।पीछे कुछ नहीं था।सिर्फ हल्की-सी नमी।जैसे कागज़ अभी-अभी किसी गीली जगह से निकाला गया हो।अंगद ने उसे अपनी हथेली में दबा लिया।उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।“दस साल…”शब्द उसके मुँह से अपने आप निकले।तभी—धड़ाम!ट्रेन अचानक झटके से रुकी।डिब्बे की लाइट एक बार झपकी।फिर वापस जल गई।अंगद ने सामने देखा।लोग अपनी सीटों पर थे।वही आदमी खिड़की के पास सो रहा था।वही महिला फोन पर बात कर रही थी।वही बच्चा अपनी माँ के कंधे पर सिर रखकर सो रहा था।सब