कमरे में गूंजती हुई उस घंटी की आवाज़ ने जैसे किसी सोए हुए बवंडर को अचानक जगा दिया था। वह आवाज़ सिर्फ एक दरवाजे की दस्तक नहीं थी, बल्कि उस अदृश्य तलवार की तरह थी जो किसी भी वक्त एक्स्ट्रा-मेरिटल अफेयर के इस नाजुक और वर्जित ताने-बाने को चीरकर रख सकती थी। राघवन का दिल एक पल के लिए जैसे अपनी जगह से छिटक कर हलक में आ गया था। उसके हाथ में दबी सिगरेट की राख बिस्तर की सफेद चादर पर बिखर गई, और उसके चेहरे का रंग फीका पड़ गया।दूसरी तरफ, मीरा, जो कुछ पल पहले तक अपनी