एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 1

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रात के ढाई बज रहे थे। कमरे में एकमात्र उजाला राघवन के लैपटॉप की स्क्रीन से आ रहा था, जिसकी ठंडी नीली रोशनी उसके चेहरे पर एक अजीब सा पीलापन और थकान उकेर रही थी। स्क्रीन पर कर्सर एकटक झपकी ले रहा था, मानो उसे भी कोई सुध न हो कि क्या टाइप करना है। बगल में रखी कॉफी का कप अब पूरी तरह ठंडा हो चुका था, जिसकी सतह पर जमी मलाई की परत आधुनिक महानगर की उस स्थिर ठहराव की गवाही दे रही थी, जिसमें गति तो बहुत थी, पर जीवन का वेग गायब था।राघवन ने अपनी उंगलियों