दिल ने देर से चुना - 2

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@copyrightnovelPart 2 — सपनों की कीमतआरोही ने उस रात बहुत सोचने के बाद आखिरकार फैसला कर लिया था कि वह अपना सपना नहीं छोड़ेगी। घर में पैसे नहीं थे, पिता के ऊपर कर्ज था और मां लगातार यही समझा रही थीं कि पहले घर संभालना जरूरी है, लेकिन आरोही के मन में एक बात साफ थी—अगर उसने आज डरकर अपना सपना छोड़ दिया, तो शायद जिंदगी भर खुद को माफ नहीं कर पाएगी। अगले दिन सुबह वह अपनी पुरानी डायरी लेकर आरव, कबीर और विवान के पास पहुंची। डायरी के पहले पन्ने पर उसने बड़े अक्षरों में लिखा था—"मेरी कंपनी।"