Shakti ke Shiv - 16

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घाट पर अब पहले से कहीं ज़्यादा भीड़ जमा हो चुकी थी।गंगा की लहरों पर तैरते छोटे-छोटे दीपक अंधेरे पानी को रोशनी से भर रहे थे।चारों ओर घंटियों की आवाज़, शंखनाद और "हर-हर महादेव" के जयकारे गूँज रहे थे।आरती शुरू होने वाली थी।शक्ति और अलिशा भीड़ के बीच एक किनारे खड़ी थीं।शक्ति की नज़र सामने गंगा पर टिक गई।दिनभर की थकान जैसे उस शांत दृश्य को देखते ही कुछ कम हो गई।अलिशा ने धीरे से कहा—"मैडम... आरती शुरू होने वाली है।"शक्ति ने हल्का-सा सिर हिलाया।"हम्म।"उसी समय...घाट की दूसरी ओर शिवाय अपनी बहन और कुशल के साथ आकर खड़े हुए।शिवाय की