Shakti ke Shiv - 15

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दिनभर की लगातार भागदौड़ और जाँच-पड़ताल के बाद शाम ढल चुकी थी।सूरज की आख़िरी किरणें गंगा के जल में समाकर सुनहरी आभा बिखेर रही थीं।शक्ति अपनी सरकारी गाड़ी से उस होटल पहुँची, जहाँ उसके ठहरने की व्यवस्था की गई थी।जैसे ही वह कमरे में पहुँची, उसने थककर अपना बैग एक ओर रखा और गहरी साँस ली।पूरा दिन पुरानी हवेलियों, गुप्त कमरों और अधूरे सुरागों में बीत गया था।उसका सिर हल्का-हल्का भारी हो रहा था।तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।"आइए।"दरवाज़ा खुला और अलिशा मुस्कुराते हुए अंदर आई।"मैडम...""एक बात कहूँ?"शक्ति ने हल्की मुस्कान के साथ उसकी ओर देखा।"कहो।""हम पहली बार बनारस आए हैं...""सुना