अन्तर्निहित - 56

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[56]“सारा जी। चलें क्या?” शैल ने पूछा। सारा ने कोई उत्तर नहीं दिया। शैल ने सोचा, ‘सारा जी ने सुना नहीं होगा।’ अत: पुन: पूछा, “सारा जी। चलो चलें। सूरज खूब चड चुका है।” सारा ने पुन: कोई उत्तर नहीं दिया। वह दूर कहीं क्षितिज को ताड़ रही थी। शैल समीप गया और बोला, “सारा जी मैं आपसे कुछ पुछ रहा हूँ। आप अनुत्तर हैं। क्या बात है सारा जी?”सारा शैल की तरफ मुड़ी और बोली, “जी, कौन सारा?”“आप ही तो हैं सारा जी?”“मैं?”“हाँ, आप।”“जी नहीं, श्रीमान। यहाँ कोई सारा नहीं है।” “तो आप कौन हैं?”“तुमने मुझसे पूछा क्या?”“जी। आपसे ही