चांदनी - 2

---*चांदनी*  _लेखिका: वंदना शर्मा_इस आजादी का फायदा उठा चांदनी घर में सबका अपमान करती। कहती - "जब मेरे पति को कोई दिक्कत नहीं, तो तुम कौन होते हो मुझे कुछ कहने वाले।"घर में सब चांदनी के व्यवहार से दुखी थे। सोहन की जॉब अगले ही महीने दूसरे शहर में लग गई। शुरू में सोहन अकेले ही शहर गया। उसने सोचा मैं पहले खुद वहां पैर जमा लूं फिर ले जाऊंगा अपनी बीवी को।लेकिन चांदनी का शातिर दिमाग कद और साजिश करने में व्यस्त था। उसने अपने सास-ससुर से झूठ बोला कि सोहन ने उसका टिकट बुक करा दिया है और उसे