Shakti ke Shiv - 14

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पुरानी हवेली की पहली मंज़िल...हवा के हर झोंके के साथ टूटी हुई खिड़कियाँ चरमराने लगती थीं।चारों ओर फैली धूल और सन्नाटा इस जगह को और भी रहस्यमयी बना रहे थे।शक्ति अपनी टीम के साथ पूर्वी हिस्से की तलाशी ले रही थी।हर कमरा, हर दीवार और हर कोना उसकी पैनी नज़रों से गुजर रहा था।"मैडम..."अलिशा ने धीरे से आवाज़ दी।"इधर आइए।"शक्ति तुरंत उसकी ओर बढ़ी।कमरे की एक दीवार बाकी दीवारों से अलग दिखाई दे रही थी।उस पर जमी धूल के बीच कुछ जगह साफ़ थी, जैसे हाल ही में किसी ने उसे छुआ हो।शक्ति ने हथेली से दीवार पर हल्का दबाव