नामुमकिन इश्क - एपिसोड 28

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एपिसोड 28 – दिल की बेचैनीअगली सुबह सिटी हॉस्पिटल में बाकी दिनों की तरह ही हलचल थी, लेकिन आज अर्जुन कुछ बदला-बदला सा लग रहा था।वह इमरजेंसी यूनिट में खड़ा मरीज की फाइल देख रहा था, मगर बार-बार उसकी नज़र दरवाज़े की तरफ़ चली जाती।गौरव ने आखिरकार पूछ ही लिया,"क्या हुआ भाई? सुबह से दरवाज़े को ऐसे देख रहा है जैसे कोई VIP आने वाला हो।"अर्जुन ने फाइल बंद करते हुए कहा,"कुछ नहीं।"गौरव हँस पड़ा।"कुछ नहीं? कल से कम से कम दस बार पूछ चुका हूँ कि आयत आई या नहीं।"अर्जुन ने उसे घूरकर देखा।"अपना काम कर।""अच्छा! समझ गया।"गौरव मुस्कुराते