हुक्म और हसरत - 19

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️ हुक्म और हसरत ️#ArsiaChapter 19 > **"हमें तुमसे प्यार कितना, ये हम नहीं जानते... मगर जी नहीं सकते , तुम्हारे बिना ………रात धीरे-धीरे और गहरी होती जा रही थी। महल की ऊँची दीवारों पर पसरा सन्नाटा किसी अनजाने तूफ़ान की आहट दे रहा था। रात का भोजन समाप्त हो चुका था।सब कुछ सामान्य लग रहा था...लेकिन किस्मत चुपचाप अपनी अगली चाल चल चुकी थी। अपने कमरे में बैठी सिया अचानक अपना सिर थामकर बैठ गई।"आह..." उसकी कनपटियों में तेज़ दर्द उठने लगा।साँसें भारी होने लगीं।कमरे की हर चीज़ उसकी आँखों के सामने धुँधली पड़ने लगी।उसने बिस्तर का सहारा लेकर उठने की