जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है

जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है _लघुकथा - वंदना शर्मा_रिमझिम सावन बरस रहा था। आसमान में काले बदरा छाए हुए थे। लगता था पूरे दिन बरसेगा आज। पर मीना के चेहरे पर उदासी थी।पूरा दिन बिना मुस्कुराए बीत जाता था। बालकनी में बैठी मीना बाहर देख रही थी। मन में सवाल था - "क्या शादी के बाद सबकी जिंदगी बोरिंग हो जाती है या मेरे साथ ही ऐसा है?"तभी दरवाजे की घंटी बजी। पड़ोसन नेहा सामने खड़ी थी। मीना ने उसे अंदर बुलाया।सोफे पर बैठते हुए नेहा बोली, "मीना कभी घर से भी बाहर निकल। जिंदगी खूबसूरत नहीं होती, बनानी पड़ती