Shakti ke Shiv - 13

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सुबह का समय...राजघाट से कुछ दूरी पर स्थित पुरानी हवेलियों का इलाका वर्षों से वीरान पड़ा था।टूटी हुई दीवारें...जंग लगे लोहे के फाटक...और चारों तरफ़ फैली खामोशी...मानो समय यहाँ आकर ठहर गया हो।एक काली एसयूवी धीरे-धीरे सबसे बड़ी हवेली के सामने आकर रुकी।कुशल नीचे उतरा और चारों ओर सतर्क नज़र दौड़ाई।"सर... यही जगह है।"शिवाय भी गाड़ी से उतरे।उन्होंने हवेली की ओर देखा।वर्षों की धूल से ढका विशाल फाटक अब आधा खुला हुआ था।शिवाय कुछ पल तक उसे देखते रहे।फिर धीमे स्वर में बोले—"ये दरवाज़ा हमने नहीं खोला..."कुशल तुरंत सतर्क हो गया।"मतलब...?"शिवाय ने फाटक पर पड़े ताज़ा पैरों के निशानों की