अवनि एक अटूट विश्वास - 9

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खामोश इकरारपहाड़ी से कार तक का वह छोटा सा रास्ता जैसे एक अनंत सफर बन गया था। न अवनि कुछ बोली, न आर्यमन। बस उनकी धड़कनें एक-दूसरे से बातें कर रही थीं। आर्यमन का सीना गर्व और ग्लानि से भरा था कि उसने एक ऐसी दिव्य आत्मा को पहचानने में भूल की, जो उसके लिए अपनी जान तक देने को तैयार थी।वह उसे गोदी में लिए बस चलता जा रहा था, और उसकी नज़रें अवनि के मासूम चेहरे पर टिकी थीं, जैसे वह उस चेहरे की हर लकीर को अपने दिल में हमेशा के लिए उतार लेना चाहता हो।आज उसे अहसास