औपचारिकता भरे रिश्ते

औपचारिकता भरे रिश्तेसोहन ऑफिस जाते हुए उदास लग रहा था। उसकी आँखों में वो उदासी साफ झलक रही थी जिसे वो छिपाने की कोशिश कर रहा था। उसकी धर्मपत्नी मीना एक अध्यापिका थी। पति-पत्नी का रिश्ता इतना गहरा था कि मीना से सोहन के भाव छिपे न रह सके। मीना ने सोहन का धीरे से हाथ पकड़ा और बड़े प्यार से पूछा - "क्या हुआ जी, कहीं खोए-खोए हुए लग रहे हो। कुछ ठीक नहीं लग रहा।"सोहन ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा- "मीना, तुम कैसे मेरा मन पढ़ लेती हो, बिना बताए समझ जाती हो मेरी परेशानी। कोई खास बात