जिस जीवन में तुम थे - 7

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वह कुछ दिनों से सोच में कई दिन सोचने और काफी दिनों की मुलाकातों के बाद समर आखिर पूछ ही लेता है, कि वे फ़ोन नंबर क्यों नहीं साझा करते? यूं ही तो इंसान के शक सुबहा दूर होते हैं।बारिश अभी-अभी रुकी थी। सर्दियों की बारिश ने ठिठुरन और बढ़ा दी थी।कैफ़े की खिड़की पर पानी की कुछ बूँदें अब भी अटकी हुई थीं।समर सामने बैठी अन्विता को देख रहा था।कई महीनों के पत्राचार और कुछ मुलाक़ातों के बाद भी एक बात उसके भीतर अटकी हुई थी।आख़िर उसने पूछ ही लिया।"एक बात पूछूँ?"अन्विता ने मुस्कुराकर सिर हिला दिया।"हमने आज तक