Shakti ke Shiv - 11

शिवाय और कुशल की एसयूवी शहर की तंग गलियों से निकलकर एक पुराने मोहल्ले में पहुँची।गाड़ी एक साधारण से दोमंज़िला मकान के सामने आकर रुकी।कुशल ने बाहर नज़र दौड़ाई।"यही पता है, सर।"शिवाय ने बिना कुछ कहे दरवाज़ा खोला और नीचे उतर गए।मकान पुराना था, लेकिन साफ़-सुथरा। बरामदे में तुलसी का चौरा बना था और दरवाज़े पर पीतल की घंटी लगी हुई थी।कुशल ने आगे बढ़कर घंटी बजाई।कुछ ही क्षण बाद दरवाज़ा खुला।करीब पैंतालीस वर्ष का एक व्यक्ति सामने खड़ा था। उसकी नज़र पहले कुशल पर गई, फिर शिवाय पर टिक गई।"जी... किससे मिलना है?"शिवाय ने शांत स्वर में कहा—"हमें आपके