विद्या और अविद्या

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“विद्या और अविद्या किसको कहते हैं?” तो बड़ा सारगर्भित और संक्षिप्त उत्तर देता है उपनिषद्: “अहंभाव की जन्मदात्री अविद्या है और जिसके द्वारा अहंभाव समाप्त हो जाए, वही विद्या है।“-सर्वसार उपनिषद्, श्लोक- 3 जिससे अहंभाव जन्म ले, वो है अविद्या, और जिससे अहंभाव समाप्त हो जाए, वो है विद्या।दो तरह का ज्ञान हो सकता है: एक ज्ञान वो जिसमें मात्र विषय की, जो दिखाई पड़ रहा है, जो ऑब्जेक्ट (वस्तु) है, उसकी बात होती है, उसको कहते हैं अविद्या।अविद्या के माध्यम से समाज को जानने मे मदद मिलती हैं , जो हमें स्कूल, कॉलेज, युनिवर्सिटी में दी जाती हैं।ये हमको