दोस्ती

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बाजार की एक दुकान के शीशे में रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड चमक रहे थे। सीमा ठिठक गई। उसने दो सुंदर ब्रेसलेट खरीदे और बैग में रख लिए। घर जाने का मन नहीं था तो पास के पार्क में एक खाली बेंच पर बैठ गई।सामने बच्चे अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे। माएं बच्चों को झुला रही थीं। कुछ महिलाएं एक साथ बैठी हंस-हंस कर बातें कर रही थीं। ये सब देखकर सीमा का दिल भर आया। उसने बैग से ब्रेसलेट निकाले और सोचने लगी "इन्हें दूंगी किसे? मेरी तो कोई दोस्त ही नहीं।"सीमा की आंखों के सामने बचपन तैर गया। सीमा