आज सुबह से ही आकाश में बादल छाए हुए थे, बस बरसात आने की देर थी। मां ने बोला इसलिए वह अपना सारा कामकाज छोड़कर छत पे सुखाए सारे कपड़े एक एक करके उतार रही थी। तभी मां ने आवाज लगाई,"रिमझिम जल्दी कर बारिश आने ही वाली है, सारे कपड़े भीग जायेंगे और जो छत पे पापड़ सुखाए है वो भी ले लेना"रिमझिम ने जल्दी जल्दी हाथ चलाना शुरू कर दिया। वह मां पर गुस्सा होने लगी।"अरे पता था कि आज बारिश आयेगी तो फिर पापड़ सुखाने की क्या जरूरत थी। अब भला इन्हे कोन समझाए।" थोड़ी नाराजगी के साथ वह