अन्या :एक अधूरी मुस्कान

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बारिश उस दिन कुछ ज़्यादा ही तेज़ हो रही थी। आसमान जैसे खुद भी किसी गहरे दुख में डूबा हुआ था। घर के आँगन में लोगों की भीड़ थी, लेकिन उस भीड़ के बीच एक छोटी-सी लड़की बिल्कुल अकेली खड़ी थी।उसकी उम्र सिर्फ़ बारह साल थी, लेकिन उस दिन उसकी आँखों में बचपन कहीं खो गया था।अन्या अपनी माँ की तस्वीर को सीने से लगाए बस दरवाज़े की तरफ देख रही थी। उसे अब भी उम्मीद थी कि उसकी माँ वापस आएगी और उसे अपनी बाहों में भर लेगी।"माँ... आप बोलती थीं ना कि कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ोगी... फिर