एक मुलाकात

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     रात के दस बजने वाले थे।  अहमदाबाद के प्लेटफॉर्म से गुजरात मेईल बस छूटने ही वाली थी  नीलोफर.. कि  तभी आपने फर्स्टकलास के उस कंपार्टमेंट मे प्रवेश किया। दोनों बच्चों और ढेर सारे सामान को कंपार्टमेंट में चढ़ानेसे पहले कहीं ट्रेन चल ना पड़े इस डर से आपका खूबसूरत चेहरा हांफने लगा था। किन्तु इस जल्दबाजी के दरमियान भी आप के सामने वाली स्लीपिंग बर्थ पर बैठ कर इत्मीनान से अंग्रेजी मेगज़ीन पढ़ रहे एक नौजवान को देख आपका दिल एक धड़कन चूक गया। फिर तो ट्रेन शुरू हुई तब तक और भाईजान और अम्मी जान को खुदा हाफ़िज़ कहते