कमला सुबह चार बजे उठी थी। रात भर की बारिश ने मिट्टी की दीवारों में नमी भर दी थी, पर वह इस आदी थी। चूल्हे पर पानी चढ़ाया, बचे हुए आटे से दो रोटियाँ बनाईं। एक उसने खुद खाई, दूसरी कागज में लपेटकर झोले में रख दी। अमित को कॉलेज भेजने के बाद वह सीधे शर्मा जी के बंगले जाएगी। वहाँ सुबह का काम जल्दी निपटाना था। आज शाम को अमित का कॉलेज में सम्मान समारोह था। उसे पुरस्कार मिलना था। कमला के कदम जैसे हवा में उड़ रहे थे। उसने सोचा, आज काम खत्म करके जल्दी वापस आएगी। अमित