उस पहली मुलाक़ात के बाद समर कई दिनों तक कोई पत्र नहीं लिख पाया।शब्द, जो इतने महीनों से सहजता से उसके पास चले आते थे, अब जैसे कहीं छिप गए थे।क्योंकि अब अन्विता केवल एक आवाज़ नहीं थी।केवल एक लिखावट नहीं थी।केवल एक उपस्थिति नहीं थी।अब उसके पास एक चेहरा था।एक मुस्कान थी।एक ठहरकर बोलने का ढंग था।और सबसे बढ़कर,एक वास्तविक अस्तित्व था।मनुष्य कल्पनाओं से प्रेम कर सकता है।लेकिन वास्तविकता से प्रेम करना कहीं अधिक कठिन होता है।क्योंकि वास्तविकता नश्वर होती है।नवंबर धीरे-धीरे बीत रहा था।पेड़ों से पत्ते गिरने लगे थे।और समर ने महसूस किया कि उसके भीतर एक अजीब-सी