कालू की पहाड़ी - 14

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बुजुर्ग की बातें सुनकर कार्तिक के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। बाबा की आँखें अब लाल हो चुकी थीं और उनकी आवाज़ किसी गहरी गुफा से आती हुई प्रतीत हो रही थी।उन्होंने कार्तिक का कंधा ज़ोर से झकझोरा और उन तीन सबसे महत्वपूर्ण कार्यों की व्याख्या की:पहला माँ की रूह का विसर्जन (अधूरा कर्तव्य)बाबा ने कहा, "बेटा, कालू की रूह इसलिए तड़प रही है क्योंकि उसकी माँ की रूह को भी शांति नहीं मिली। जब गाँव वालों को पता चला कि कल्याण सिंह पहाड़ी से गिरकर मर गया, तो उसकी बूढ़ी माँ नंगे पाँव रोती हुई उस चोटी पर पहुँची। अपने बेटे